Wednesday, 12 September 2007

ग़ज़ल

ज़रूरतें जो हें दरपेश कल के बारे में ,
जनाब सोचिये रद्दोबदल के बारे में !

ये कैसे बुझ गई उसके जुनूं की चिंगारी ,
सहम के सोच रहा है पहल के बारे में !

मेरा ख़ुलूस ही आख़िर मुझे बचायेगा ,
मैं जानता हूँ तुम्हारे शगल के बारे में !

न जाने मुझमें वो क्या क्या तलाश करता है ,
जो पूछता है अधूरी ग़ज़ल के बारे में !

अगर दिमाग से सोचोगे हार जाओगे ,
तुम अपने दिल ही से पूछो ग़ज़ल के बारे में !

डॉ. ब्रजेश शर्मा