Wednesday, 2 January 2008

सूरज के हस्ताक्षर " गीत "

कहने को तो हम आवारा स्वर हैं ,

इस वक़्त सुबह के आमंत्रण पर हैं !
हम ले आये हैं बीज उजाले के ,

पहचानो सूरज के हस्ताक्षर हैं !
वह अपना ही मधुवंत कलेजा था , जो कुटियों में भी सत्य सहेजा था !
प्यासे क्षण में जो तुम्हें मिल होगा , वह मेघदूत हमने ही भेजा था !
उजली मंजिल का परिचय पाने को,हम दिलगीरों से नज़र मिलाने को !
माथे को ज्यादा ऊँचा क्या करना , हम धरती पर ही बैठे अम्बर हैं !
हम राही अनदेखी राहों वाले ,
अमृत घट तक लंबी बाँहों वाले,
ज्वालामुखियों की आग बता देगी ,
हम हैं कैसे अंतर्दाहों वाले !
अपना तेवर मंगलाचरण का है , हम उठे समय का माथा ठनका है ,
अंधी उलझन के वक़्त चले आना , हम प्रश्न नहीं हैं केवल उत्तर हैं !
ये सांसें ऐसी गंध संजोती हैं ,
जो सदियाँ हमसे चंदन होतीं हैं,
ये और बात सीपी में बंद रहे ,
वैसे हम जन्मजात ही मोती हैं !
हम कालजयी ऐसी भाषा सीखे
जिस युग में दीखे आबदार दीखे ,
दूसरा और आकार न स्वीकारा, हम एक बूँद में सिमटे सागर हैं !
कवि श्री सोम ठाकुर