Wednesday, 19 December 2007

मुक्तक


कुछ पहले पहले आज न दुनियां ठगी गई ,


सुमनों के सिर पर सदा धूल ही मली गई !


बाहें फ़ैला कर पुलिनों ने सरिता से माँगा आलिंगन ,


प्रिय ! आज नहीं कल-कल कहती वह चली गई !


श्री शिव मंगल सिंह सुमन