मंजूषा
Wednesday, 19 December 2007
मुक्तक
मरहम से क्या होगा ये फोड़ा नासूरी है ,
अब तो इसकी चीर-फाड़ करना मज़बूरी है !
अब तुम कहो !कि ये तो हिंसा है !
होगी ! लेकिन बहुत ज़रूरी है !
श्री मुकुट बिहारी सरोज
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